वाह क्या बात है ...!मै तो बहुत खुश हू क़ि सचिन ने अपना दोहरा शतक मेरे नाम किया है, आपके नाम भी किया है। पूरे देशवासियो के नाम किया है।
होना ही था ऐसा । देर से ही सही, पर हुआ तो क्रिकेट में ऐसा करिश्मा, बेहतरीन नज़ारा था कल का। गेंद को घूरती बाज़ सी आँखें, गज़ब के क्लास्सिकल शोट्स, पैरों में चीते सी फुर्ती, हर शोट्स ऐसा लग था की कोई संगीत बज रहा हो मीठी सी। उन 25 चौको की धुन मोजार्ट के किसी क्लास्सिक से कम नहीं थे। और बल्ले से गेंद की टकराने की आवाज़ रहमान के " जय हो " कम नहीं लग रही थी।
कल सचिन ने वो दिखया जिसकी केवल कल्पना ही की जा सकती थी । वन डे क्रिकेट में 200 रन । सुनना अच्छा लगता है । ये टेस्ट में 500 रन मरने जैसा है। कल तो २०-२० के अज्दाज़ में 50-50 हुआ। वन डे में दोहरा शतक ठोक कर सचिन ने ऐसा पहाड़ खड़ा किया है की कोई शायद ही पार करने की सोचे। पोंटिन, जयसूर्या, अफरीदी, सहवाग अपनी आतिशी परियो से बना सकते है , हो सकता है की कोई और ऐसा कारनामा करे पर दुनिया पहले योद्धा को याद रखती है। सचिन हर 20-20 नहीं खेलते पर अपने को मुंबई की तरफ से खलने की वज़ह से अपना पैनापन बनाये हुए है।
अपना पहला शतक बनाने में लगभग पांच साल सा वक़्त लगा। पर उसके बाद तो लगतार 46 आ गए। 1994 में newzealand के खिलाफ जब सचिन पहली बार ओपन करने आये तो केवल 49 बाल में 82 रन ठोक डाले , यही से मास्टर ब्लास्टर का जन्म हुआ। जब यही सचिन रन नहीं बनता तो कुछ ऐसे लोग ताने देते है जो क्रिकेट में सचिन के सामने बौने ही नहीं चिटी के बराबर है, जिनका अनुभव केवल पचास मैच का होता है। पर आज तो.....
सारा देश खुश है पर मिडिया जगत में कोई अगर सबसे खुश होता तो वे प्रभाष जोशी थे जो कुछ दिन पहले ही सचिन का एक शतकीय पारी देखने के दौरान ही दिल के दौरे से चल बसे पर उनकी आत्मा भी बहुत खुश होगी।
442 मैच 46 शतक और 93 अर्धशतक के साथ 17598 रन, अन्त्ररास्त्रिया क्रिकेट में 93 शतक सचिन की महानता की कहानी खुद कहते है। यह सचिन की बिनाम्रता ही है क़ि कहते है रिकार्ड तो बनते ही है टूटने के लिए। पूरे पचास ओवर तक खेलना फिटनेस का बेहतरीन उदहारण है वो भी बीस सालो से खेलते हुए। यह एक महान योद्धा ही होता है की बार बार घायल होने के बाद भी लड़ने आता है। और जीतता भी है। सचिन क्रिकेट के अर्जुन, कर्र्ण, या फिर अखिलिस से कम नहीं है।
इस महान योद्धा को सादर नमन।
कल सचिन ने वो दिखया जिसकी केवल कल्पना ही की जा सकती थी । वन डे क्रिकेट में 200 रन । सुनना अच्छा लगता है । ये टेस्ट में 500 रन मरने जैसा है। कल तो २०-२० के अज्दाज़ में 50-50 हुआ। वन डे में दोहरा शतक ठोक कर सचिन ने ऐसा पहाड़ खड़ा किया है की कोई शायद ही पार करने की सोचे। पोंटिन, जयसूर्या, अफरीदी, सहवाग अपनी आतिशी परियो से बना सकते है , हो सकता है की कोई और ऐसा कारनामा करे पर दुनिया पहले योद्धा को याद रखती है। सचिन हर 20-20 नहीं खेलते पर अपने को मुंबई की तरफ से खलने की वज़ह से अपना पैनापन बनाये हुए है।
अपना पहला शतक बनाने में लगभग पांच साल सा वक़्त लगा। पर उसके बाद तो लगतार 46 आ गए। 1994 में newzealand के खिलाफ जब सचिन पहली बार ओपन करने आये तो केवल 49 बाल में 82 रन ठोक डाले , यही से मास्टर ब्लास्टर का जन्म हुआ। जब यही सचिन रन नहीं बनता तो कुछ ऐसे लोग ताने देते है जो क्रिकेट में सचिन के सामने बौने ही नहीं चिटी के बराबर है, जिनका अनुभव केवल पचास मैच का होता है। पर आज तो.....
सारा देश खुश है पर मिडिया जगत में कोई अगर सबसे खुश होता तो वे प्रभाष जोशी थे जो कुछ दिन पहले ही सचिन का एक शतकीय पारी देखने के दौरान ही दिल के दौरे से चल बसे पर उनकी आत्मा भी बहुत खुश होगी।
442 मैच 46 शतक और 93 अर्धशतक के साथ 17598 रन, अन्त्ररास्त्रिया क्रिकेट में 93 शतक सचिन की महानता की कहानी खुद कहते है। यह सचिन की बिनाम्रता ही है क़ि कहते है रिकार्ड तो बनते ही है टूटने के लिए। पूरे पचास ओवर तक खेलना फिटनेस का बेहतरीन उदहारण है वो भी बीस सालो से खेलते हुए। यह एक महान योद्धा ही होता है की बार बार घायल होने के बाद भी लड़ने आता है। और जीतता भी है। सचिन क्रिकेट के अर्जुन, कर्र्ण, या फिर अखिलिस से कम नहीं है।
इस महान योद्धा को सादर नमन।
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