आखिर कांग्रेस के बड़े भडवे जैसे राहुल, दिग्विजय, चिदंबरम, मनमोहन, सिब्बल कर क्या रहे है। और साला हमलोग भी तमाशा देखते है की अकेले अन्ना या रामदेव क्या कर लेंगे। कुछ नहीं कर सकते अकेले, उनको भी हमारा साथ चाहिए, जैसे भ्रस्त लूटेरे नेताओ को जनता साथ देती है। जब राजा जैसा लूटेरा जेल से छूट कर वापस जाता है तो उसका किसी महाराजा जैसा स्वागत होता है। आखिर में हमें ही ये देखना है की हम किस ओर है भ्रस्त नेताओ को सपोर्ट करते है या अन्ना या रामदेव का जो इस जानलेवा कांग्रेस सरकार से लड़ रहे है।
भाई हमारे ही कुछ दोस्त कहते है की सब बकवास है अपना मकसद है। एक बात की बिना मकसद के क्या हो सकता है ? मकसद चाहे जो भी हो लेकिन देश को लूटना मकसद नहीं हो सकता. देश को लूटने का मकसद केवल गाँधी परिवार और बफादारो को है। अन्न या फिर रामदेव का नहीं।
हमें बड़ा अफ़सोस है की भारत की व्यवस्था ही ऐसी है की हम एक नपुसंक के शासन तले रहने को मजबूर है। कुछ कर सकने का टाइम 2014 में है। तब तक हम लोगो के पास 2 आप्शन है पहला की हम लोग जन आन्दोलन के औचित्य पर सवाल खड़े करते रहे और लूटेरे हमें लुटे रहे .
और दूसरा की किसी भी जनांदोलन जो भ्रस्टाचार और भ्रस्तो के खिलाफ है उसे समर्थन करे।
अब हमलोगों के पास दो ही आप्शन है-
1- लूट और लूटेरे को समर्थन दो मतलब भ्रस्टाचार के साथ में
2- या फिर भ्रस्टाचार के खिलाफ में।
अब हम तठस्थ नहीं रह सकते-
"समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तठस्थ है समय लिखेगा उनके भी अपराध।"
हमारा जीवन हमारा भविष्य हमारा चुनाव .
..................................................................... Atul K. Rai
