क्या करू थोडा वक़्त बीत गया इस घटना कों पर अब इस पे लिख रहा हूँ। घटना ही है भाई। आखिर भारतीय कप्तान की शादी जो थी। शादी कैसी थी इस के बारे तो पता नहीं, पर बाहर के मौसम के बारे में जरुर पता है. बाहर का मौसम खास कर के मीडिया में मौसम तो कॉमेडी वाला था। दिन भर तरह तरह की खबरे चली टीवी पे। जैसे ये कोई रास्ट्रीय उत्सव हो। पर शादी में बुलावा किसी का नहीं था। मीडिया वालो को भी नहीं। इस शादी से मीडिया का एक नया चरित्र सामने आया है।भारतीय चैनल के लिए इस से बुरा और क्या हो सकता है की जिस दिन वे धोनी के शादी चालीसा का बखान कर रहेथे उसी समय एक विदेशी चैनल छत्तीसगढ़ में नक्क्सलियो द्वारा एक पुल को उडाये जाने का खबर दे रहा था. वोभी पुरे बिस्तार के साथ, लेकिन अपने यहाँ धोनी की शादी की खबरे फ्लैश हो रही थी. बार बार यही दोहराया जा रहाथा की जॉन अब्राहम डी जे पे नाच रहे है.
खबरिया चैनलों की इस मानसिकता के बारे में क्या कहा जाये जब देश में एक साथ कई बड़ी खबरे हो, महंगाई कोलेकर देश भर में बिपक्ष का बंद हो या छत्तीसगढ़ में नक्क्सलियो के सफाए के लिए सरकार के कदम हो, या जम्मूकश्मीर में फसे लाखो अमरनाथ यात्रिओ की खबर हो,या प्रधानमंत्री के खाने में पाई गई कमियों का मामला हो. अपने चैनलों को ऐसी खबर पसंद ही नहीं आती जो देश हित में हो.और उसे सारा देश जानना चाहता हो.
मुझे नहीं लगता की धोनी की शादी में किसी की इतनी ज्यादा रूचि थी। मेरे कुछ मीडिया के दोस्तों ने कहा की धोनीकी शादी बस एक खबर थी जिसे एक या दो मिनट के पैकज में निपटाई जा सकती थी. लेकिन उन चैनलों का खेलस्तरहीन और बेहद घटिया था. एक बड़े पत्रकार तो उस रेसोर्ट तक पहुँच गए और मेनेजर को पकड़ के एक घंटे काशो कर डाला, की ये देखिये ये वो जगह ज़हा मंडप था ,ये वही सिन्दूर है जिसे धोनी ने अपनी वीवी के मांग में भरा था, यहाँ टेबल लगी थी, उस रिपोर्टर से इस तरह की उम्मीद नहीं थी . घटियापन का हद की धोनी की बीवी को क्रिकेट सीरिज से जोड़ दिया की वो सीरिज जितवा देंगी. कप्तान की शादी के बाद भारत पहला मैच ही बुरी तरह हार गया....
जब देश की जनता महंगाई से त्रस्त हो, नक्सली हमले बेकाबू हो रहे हो, रेल एक्सिडेंट बढ़ रहे हो, उस वक़्त चैनलोंने धोनी की शादी के नाम पर जो रायता फैलाया वो बेहद नीची मानसिकता का परिचायक था... स्टूडियो में पंडितोको बैठा कर फेरो के बारे में ज्ञान लेना समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं था..मीडिया वाले बार बार इस तरह केकाम करते है और फिर कसम खाते है की आगे वे ऐसा नहीं करेंगे.. लेकिन फिर पुराने ढर्रे पे लौट आते है.
अभिषेक की शादी में यही मीडिया वालो को मार्शल्स ने दौड़ा दौड़ा कर मारा था जब वे बिना बुलाये वह पहुच गए थेऔर खलल डालने लगे थे. पर इन्हें तो अपमानित होने की आदत पद गई है ऐसा लगता है. इनके इस तरह कीहरकतों से लगता है की इनके पास खबरों का आकाल पड़ गया है या फिर उच्च विचार वाले लोगो का. अगर इन्हेंअपनी विश्वनीयता बरक़रार रखनी है तो ऐसे निचले दर्जे के कार्यक्रम करने से बचाना चाहिए । दुसरो से बात बातपर जवाब मांगे वाले चैनलों से दर्शक अब खुद की जवाब मांग ने लगे है. इन्हें जन सरोकार के मुद्दों पे ज्यादा खबरदेनी होगी तब जाकर समाज के प्रति इनकी जवाबदेही पूरी होगी।
और अंत में महान मुरली को 800 विकेट लेने पे बधाई..........
......ATUL K. RAI
