Tuesday, January 12, 2010

खा गई चीनी पी गई तेल, ये देखो कांग्रेस का खेल....

अब नया खेल। हर २५ किलोमीटर पर सोनिया और मनमोहन के फोटो बड़े होर्डिंग पे लगेंगे। २०-२५ करोड़ उड़ा देने है। यहाँ गरीबो के पास खाने को पैसा नहीं है, और हमारे देश के बड़े नेतओं (सोच में तो जरुर छोटे) के फोटो लगेंगे। वो भी इतना खर्च करके। यही सरकार जब मायावती अपना मूर्ति लगवाती है तो खूब चिल्लाती है पर अपना होर्डिंग्स लगवाने में थोड़े भी नहीं शर्माती। बेशर्म है। क्या करेंगे.? कर भी क्या सकते है..? मंत्रालय की सफाई की पैसा हम नहीं देंगे। रोड बनवाने वाली कंपनी देगी। मतलब यह की सरकार खुद यह मन रही है क़ि कंपनियो पे दवाब बनती है। तो हम कहा से उम्मीद करे क़ि गुड्वात्ता होगी ।
आम आदमी क़ि सरकार है ये । जिसकी कोई खबर ही नहीं रखती है । भाड़ में जाये आम आदमी। अपना काम करना है । क्या काम हमें नहीं पता। चीनी तो ५० में बेचेंगे ही । दाल १०० में । आम आदमी को खाना है तो खाए, नहीं तो मरे। इस पर से हमरे देश के मंत्री कह रहे है क़ि हमें नहीं पता क़ि दाम कब कम होंगे। फ़िर कुर्सी से चिपकने का क्या फायदा। चिपकेंगे भाई, उनके पास सांसद है। हक है उनका।
इस सरकार के दो तीन मंत्री को छोड़ दे, कपिल सिब्बल, गृह मंत्री , तो मंत्री तो निरंकुश है। निकम्मे टाइप के। कुछ तो कुछ ज्यादा ही निकम्मे है, विदेश मंत्री और उनके ट्विट्टर मंत्री, शरद पवार । मंत्री जितने निरंकुश है तो मनमोहन उनपे लगाम लगाने उतने ही निकम्मे । मन्होहन तो ये जानने क़ि जहमत ही नहीं उठाते है क़ि उनके मंत्री क्या कर रहे है .?

सरकार विकाश दर पे धयान दे रही है भाई। दुनिया को दिखाना है क़ि हम भी ९ (नौ) प्रतिशत को छू सकते है। भले ही गरीब और गरीब हो जाये। माहौल ऐसा जानबूझ कर बनाया जा रहा है क़ि खूब विकाश हो रहा है । पर किधर । गरीबो को खाने को नसीब नहीं हो रहा है। विपक्ष ये जानने को जागरूक नहीं है क़ि सरकार वित्त और विदेश दोनों विभाग में कितनी विफल है । वो तो आपसी मारामारी में व्यस्त है । पार्टी कोई चलता कोई है
सरकार थोड़ी भी बेचैन नहीं है, क़ि महंगाई कितनी है। दिखावा भी नहीं करती, इमानदार जो है....! महंगाई के तरह तरह के बहाने है उसके पास । ( मेरे निजी विचार सरकार को एक बहाना मंत्रालय खोलना चाहिए।) बेशर्मी से कहती है क़ि महंगाई का सामना करने के अलावा कोई उपाए नहीं है। कभी कहती है क़ि उत्पादन कम है। तो कभी क़ि अंतरास्ट्रीय बाज़ार में तेज़ी। कभी क़ि कालाबाजारी और ज़माखोरी। कभी राज्य सरकारों को । कलाबाज़ारो और जमाखोरों के खिलाफ कारवाई कर नहीं सकती। कमीशन मिलता है। जब महंगाई के कारन जमाखोरी है तो बाज़ार क़ि तेज़ी का रोना क्यों रोया जाता है...? अगर महंगाई के लिए ये सब जिम्मेदार है तो सरकर किसे कहते है...? और उसका काम क्या है...? सोचना पड़ेगा न ।
कुल मिला के यह क़ि ये सरकार इतनी नाकारा है क़ि समय रहते कम पैदावार का अनुमान नहीं लगा सकी और दाल, चीनी और तेल का आयत नहीं कर सकी।

विदेश निति भी ख़राब हो गयी है। आखीर ये मंत्रालय ट्विट्टर से तो नहीं चलते। कोई नहीं जनता क़ि सरकार क्या कर रही है उन समस्या से निपटने के लिए जो पडोसी खड़े कर रहे है । चीन अपनी जमीं हड़प रहा है, पाकिस्तान शिज़ फायर का उल्लंघन कर रहा है, श्री लंका में लाखो तमिलों क़ि हालत कुत्तो जैसी है।( इस शब्द का इस्तेमाल करने पर माफ़ी चाहता हूँ) । पर प्रवासी सम्मलेन में इसकी चर्चा तक नहीं क़ि गई। पाकिस्तान और चीन क़ि बात तो छोड़ ही दे , भारत श्रीलंका, नेपाल, बंगलादेश पे भी लगाम नहीं लगा पाया.
अगर इस सरकार का बकी समय ऐसे ही बीतना है तो इस देश का गंभीर समस्या से घिरना तय है।

अगर सभी चीज ठीक हो जाये, मतलब पडोसी अपने आप सुधर जाये, महंगाई भगवान कम कर दे , मानसून सही समय से आये, कोर्ट अपना काम सही समय पे करे, अपराध खुद ब खुद काम हो जाये, आन्तरिक समस्या ख़त्म हो जाये, तो ही ये सरकार ठीक से चल सकती है। आम चुनाव में चार साल है। तब तक तो झेलना ही पड़ेगा। झेलो भैया जब चुना है तो।

"सर से सीने में कभी पेट से पावों में कभी,
एक जगह हो तो बताऊ दर्द इधर होता है॥"

6 comments:

  1. sahi hai congress ka matlab hi hai garibo ke peth pe laat maarna............

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  2. The word 'politics' is derived from the word 'poly', meaning 'many', and the word 'ticks', meaning 'blood sucking parasites'.......toh mujhe lagta hai congress humara khoon chus ke kuch galat nahi kar rahi hai......yeh unka furz hai(NEERAJ)

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  3. खा गई चीनी पी गई तेल, ये देखो कांग्रेस का खेल....
    लाख मरेगी आम जनता ये चालायेंगे अपनी राजनीति की रेल ||

    भैया आपना सही समय पर सही जगह निशाना साधा है |राजनितिक पार्टी कोई भी क्यों ना हो ,ये सिर्फ अपनी रोटी के इंतजाम में लगे रहते है |देश और देश का सो काल्ड आम आदमी से इनका कोई लेना देना नहीं है |बहुत ही उम्दा लिखा है आपने भिया एक जोरदार थप्पर इस पार्टी कों ,
    पढ़ते हुए मान तृप्त हो गया

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  4. आपने बिल्कुल सही कहा है ,लेकिन क्या करे ये बेचारे मंत्री लोग भी तो चुनाव में खर्च करके ही जीत हासिल करते है |जनता इनसे चुनाव के समय पैसा लेती है ये मंत्री बनने के बाद रुपये ऐठ्ते है |अगर सुधर जाये तो हम और आप जैसे लोग लिखेंगे कैसे |भाई ये लोग हमेशा ही जनता क्या ख्याल रखते है ,आखिर जनता ही तो इनके लिये महत्वपूर्ण है |तो अब घाबराने की बात ही नहीं है ?अरे सरकार धन कमाने के मामले में तो ठीक कर रही है न ,जय हो इस सरकार की ,और एक प्रार्थना हम सब करे की किसी तरह हमारी जान बचे रहे इस सरकार में |आपने बिल्कुल सही लिखा है |
    kashyap-iandpolitics.blogspot.com

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  5. क्या बात है भाई, कांग्रेस से नराज दिख रहे है. आपने जो लिखा है वो तारीफ के काबिल है. और यह एक आम आदमी की सोच है किन्तु यह एक तरफ़ा लग रहा है. यह आम आदमी की सरकार आम लोगो के बारे में नहीं सोचती है, जो कहना उचित है. मै आपके लेखन से परभावित हो गया हू. क्या लिखा है भाई आपने .

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